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गुलाम वंश 1206-1290 ई. | सल्तनत काल

गुलाम वंश 1206-1290 ई. तक 

यह पोस्ट गुलाम वंश को लेकर हैं  जैसा कि आप लोग जानते हैं दिल्ली सल्तनत का प्रथम राजवंश जो था वह गुलाम वंश हैं । इस पोस्ट में गुलाम वंश से जो भी प्रश्न बन सकते हैं उनके बारे में जानेंगे, गुलाम वंश से जुड़े जो भी तथ्य हैं उनके बारे में भी जानेंगे  इस पोस्ट में सारी जानकारी बहुत ही सरल तरीके से बतायी जा रही हैं 

गुलाम वंश की स्थापना हुई-1206 ई . में 

गुलाम वंश का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक था 

कुतुबुद्दीन ऐबक गौरी का गुलाम था । 

गुलामों को फारसी में बंदगॉ कहा जाता है तथा इन्हें सैनिक सेवा के लिए खरीदा जाता था ।

कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपना राज्याभिषेक किया था- 24 जून , 1206 ई . को  ।

कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपनी राजधानी लाहौर में बनायी थी । 

कुतुबमीनार की नीव कुतुबुद्दीन ऐबक ने डाली थी ।

कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद एवं अजमेर का ढाई दिन का झोपड़ा नामक मस्जिद का निर्माण ऐबक ने करवाया था- कुतुबुद्दीन ऐबक ने

लाख बख्श ( लाखों का दान देनेवालप ) भी कहा जाता था- कुतुबुद्दीन ऐबक को

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने वाला कौन था- ऐबक का सहायक सेनानायक बख्तियार खिलजी  

कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु हुई- 1210 ई . में चौगान खेलते समय घोड़े से गिरकर 

कुतुबुद्दीन ऐबक को लाहौर में दफनाया गया था 

कुतुबुद्दीन ऐबक का उत्तराधिकारी आरामशाह हुआ 

आरामशाह ने सिर्फ आठ महीनों तक शासन किया था  

आरामशाह की हत्या की- इल्तुतमिश ने, 1211 ई . में 

1211 ई . में इल्तुतमिश दिल्ली की गद्दी पर बैठा । 

इल्तुतमिश तुर्किस्तान का इल्बरी तुर्क था  जो ऐबक का गुलाम एवं दामाद था । 

कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के समय इल्तुतमिश बदायूँ का गवर्नर था । 

इल्तुतमिश लाहौर से राजधानी को स्थानान्तरित करके दिल्ली लाया ।

इल्तुतमिश ने हौज ए सुल्तानी का निर्माण देहली ए कुहना के निकट करवाया था । 

इल्तुतमिश पहला शासक था , जिसने 1229 ई . में बगदाद के खलीफा से सुल्तान पद की वैधानिक स्वीकृति प्राप्त की थी 

इल्तुतमिश की मृत्यु  हुई- 1236 ई . में 

चंगेज खाँ से बचने के लिए ख्वारिज्म के सम्राट जलालुद्दीन को इल्तुतमिश ने अपने यहाँ शरण नहीं दी थी । 

कुतुबमीनार के निर्माण को पूर्ण करवाया था- इल्तुतमिश ने 

सबसे पहले शुद्ध अरबी सिक्के जारी किए ( चाँदी का टंका एवं ताँबा का जीतल )- इल्तुतमिश ने 

इल्तुतमिश ने इक्ता प्रणाली चलाई 

इल्तुतमिश ने चालीस गुलाम सरदारों का संगठन बनाया , जो तुर्कान ए चिहलगानी के नाम से जाना जाता था 

सर्वप्रथम दिल्ली के अमीरों का दमन किया- इल्तुतमिश ने

इल्तुतमिश के बाद उसका पुत्र रुकनुद्दीन फिरोज गद्दी पर बैठा 

रुकनुद्दीन फिरोज एक अयोग्य शासक था । 

रुकनुद्दीन फिरोज के अल्पकालीन शासन पर उसकी माँ शाह तुरकान छाई रही ।

शाह तुरकान के अवांछित प्रभाव से परेशान होकर तुर्की अमीरों ने रुकनुद्दीन को गद्दी हटाकर रजिया को सिंहासन पर बैठा दिया 

रजिया बेगम प्रथम मुस्लिम महिला थी , जिसने शासन की बागडोर सँभाली । सुल्तान 

रजिया ने पर्दाप्रथा का त्यागकर तथा पुरुषों की तरह चोगा ( काबा ) एवं कुलाह ( टोपी ) पहनकर राजदरबार में खुले मुँह से जाने लगी थी 

रजिया ने मलिक जमालुद्दीन याकूत को अमीर ए अखूर ( घोड़े का सरदार ) नियुक्त किया था 

गैर तुकों को सामंत बनाने के रजिया के प्रयासों से तुर्की अमीर रजिया के विरुद्ध हो गए और उसे बंदी बनाकर दिल्ली की गद्दी पर मुइजुद्दीन बहरामशाह को बैठा दिया । 

रजिया की शादी अल्तुनिया के साथ हुई ।

अल्तुनिया के साथ शादी करने के बाद रजिया ने पुनः गद्दी  प्राप्त करने का प्रयास किया , लेकिन वह असफल रही । 

रजिया की हत्या की गई- 13 अक्टूबर , 1240 ई . को डाकुओं के द्वारा कैथल के पास 

बहराम शाह को बंदी बनाकर उसकी हत्या मई , 1242 ई . में कर दी गई 

बहराम शाह के बाद दिल्ली का सुल्तान बना- अलाउद्दीन मसूद शाह 1242 ई . में 

बलबन ने षड्यंत्र के द्वारा 1246 ई . में अलाउद्दीन मसूद शाह को सुल्तान के पद से हटाकर नासिरुद्दीन महमूद को सुल्तान बना दिया । 

नासिरुद्दीन महमूद ऐसा सुल्तान था जो टोपी सीकर अपना जीवन निर्वाह करता था ।

 बलबन ने अपनी पुत्री का विवाह नासिरुद्दीन महमूद के साथ किया था । 

बलबन का वास्तविक नाम बहाउद्दीन था । 

बलबन इल्तुतमिश का गुलाम था ।

तुर्कान - ए - चिहलगानी का विनाश बलबन ने किया था ।

बलबन 1266 ई . में गियासुद्दीन बलबन के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा । 

बलबन मंगोलों के आक्रमण से दिल्ली की रक्षा करने में सफल रहा । 

राजदरबार में सिजदा एवं पैबोस प्रथा की शुरुआत की थी- बलबन ने

फारसी रीति - रिवाज पर आधारित नवरोज उत्सव को प्रारंभ करवाया था-  बलबन ने

अपने विरोधियों के प्रति कठोर ' लौह एवं रक्त की नीति का पालन किया- बलबन ने 

बलबन को उलूग खाँ की उपाधि प्रदान की थी- नासिरुद्दीन महमूद ने 

फारसी के प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो एवं अमीर हसन रहते थे-  बलबन के दरबार में

गुलाम वंश का अतिम शासक था- शम्मुद्दीन कैमर्स 

⧭आशा करते है कि दी गयी जानकारी आपको समझ आई होगी । पोस्ट के बारे आपकी क्या प्रतिक्रिया हैं इसके इसके लिए कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं 

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