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संविधान संशोधन की प्रक्रिया | संविधान में हुए मत्वपूर्ण संशोधन

संविधान संशोधन की प्रक्रिया तथा संविधान में हुए मत्वपूर्ण संशोधन  


भारतीय संविधान संशोधन के बारे में प्रावधान भाग- 20, अनुच्छेद- 368 में किया गया हैं 
भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के संविधान से ली गई हैं  ।

इस आर्टिकल हम जानेगे संविधान संशोधन के बारे में । बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है । इसमें हम जानेगे किस प्रक्रियां के द्वारा संविधान में संशोधन किया जाता है । 
महत्वपूर्ण संविधान संशोधनो के बारे में भी जानेंगे ।महत्वपूर्ण विषय है पोस्ट को पूरा पड़े ।

संविधान में संशोधन करने की हमे पूरी प्रक्रिया के बारे में पता होना चाहिए क्यूकि आय दिन हमारे समक्ष संशोधन होते रहते है । संसद की क्या भूमिका होती है राज्यो की भूमिका होती है इसके बारे में पता होना चाहिए । हमारे संविधान में संशोधन की जो प्रक्रिया है वो कठोर भी है और लचीली भी है । कुछ लोगो ने समर्थन किया कि संविधान संशोधन की प्रक्रिया बहुत कठोर होनी चाहिए इसका समर्थन करने वाले थे- गोपाल स्वामी आयंगर और कृष्ण स्वामी अय्यर , कुछ लोगो के द्वारा कहा गया कि संविधान संशोधन की प्रक्रिया लचीली होनी चाहिए । प . जवाहर लाल नेहरू ने कहा कि संविधान संशोधन की प्रक्रिया लचीली होनी चाहिए । इस आधार पर संविधान सभा द्वारा यह निर्णय लिया गया कि संशोधन की प्रक्रिया न तो कठोर होनी चाहिए और न ही लचीली । इस आधार पर मिश्रित प्रक्रिया को अपनाया गया । इस कारण संशोधन कि जो प्रक्रिया है वे कठोर भी है और लचीली भी । संविधान सभा द्वारा फुल्टन पद्यति को अपनाया गया ।
 भारतीय संविधान में तीन प्रकार से संशोधन किया जा सकता है -
1. साधारण बहुमत द्वारा 
2. विशेष बहुमत द्वारा
3. विशेष बहुमत तथा राज्यों के अनुमोदन से 

1. साधारण बहुमत द्वारा -
ऐसा संशोधन करने के लिए कोई विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है और एक सदन द्वारा पारित किए जाने पर उस विधेयक को दूसरे सदन को भेजा जाता है । दूसरे सदन द्वारा विधेयक को पारित करने पर उसे राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेजा जाता है और राष्ट्रपति द्वारा अनुमति प्राप्त कर लेने पर विधेयक अधिनियम के रूप में प्रवृत्त हो जाता है ।
इस प्रकार के संशोधन में जैसे - राज्यों के नामों तथा सीमाओं में परिवर्तन करने , राज्यों के क्षेत्र को कम करने या वृद्धि करने , राज्यों में विधान परिषदों को गठित करने या समाप्त करने , अनुच्छेद 2  में , जिसमें राष्ट्रपति , राज्यपाल , उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के वेतन में वृद्धि या कमी करने आदि के लिए किये जाने वाले संशोधन साधारण बहुमत से किये जाते हैं । 

2. विशेष बहुमत द्वारा -
संशोधन संसद के विशेष बहुमत द्वारा किये जाने वाले संवैधानिक परिवर्तन को संविधान संशोधन कहा जाता है । इस प्रकार संविधान संशोधन करने के लिए कोई विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश किया जाता है । इस प्रकार पेश किये गये विधेयक को सदन द्वारा विशेष बहुमत से पारित किया जाना चाहिए । विशेष बहुमत से पारित किये जाने वाले विधेयक को दूसरे सदन को भेजना होता है । जब दूसरा सदन भी विशेष बहुमत से विधेयक को पारित कर दे , तब उसे राष्ट्रपति की सम्मति के लिए भेजा जाता है । राष्ट्रपति की सम्मति प्राप्त करने पर विधेयक अधिनियम के रूप में प्रवर्तित हो जाता है । 

3. विशेष बहुमत तथा राज्यों के अनुमोदन से संविधान संशोधन -
इस प्रक्रिया के द्वारा संशोधन करने के लिए कोई विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है और उस सदन द्वारा विशेष बहुमत से पारित करने के बाद दूसरे सदन को भेजा जाता है । दूसरे सदन द्वारा विशेष बहुमत से पारित करने के बाद इसे राज्यों को विधानसभाओं द्वारा अनुमोदित करने के लिए भेजा जाता है । जब राज्यों की विधानसभाओं द्वारा उसे अनुमोदित कर दिया जाता
है , तब उसे राष्ट्रपति की सम्मति के लिए भेजा जाता है । राष्ट्रपति की सम्मति मिलने के बाद विधेयक अधिनियम के रूप में प्रवर्तित हो जाता है । उदाहरण के लिए - 73 वें संविधान संशोधन को लोकसभा ने 23 दिसम्बर , 1992 को पारित किया था । इसे राज्यों की विधान सभाओं को अनुमोदन के लिए भेजा गया और 17 राज्यों की विधानसभाओं द्वारा अनुमोदित किये जाने के बाद ही राष्ट्रपति ने 20 अप्रैल , 1993 को अपनी सम्मति दी ।। इस विधेयक को राज्यों की विधानसभाओं के अनुमोदन के लिए इसलिए भेजा गया था क्योंकि यह सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में प्रविष्ट विषय से सम्बन्धित था । 

संसद की संविधान संशोधन की शक्ति- संसद की संविधान संशोधन की शक्ति असीमित नहीं है । संसद की इस शक्ति पर यह निर्बन्धन लगाया है कि संसद संविधान में संशोधन करके उसके मूल ढांचे को नष्ट नहीं कर सकती । 24 वें संविधान संशोधन , 1971 द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि जब दोनों सदनों द्वारा पारित कोई संविधान संशोधन विधेयक राष्ट्रपति के सम्मुख प्रेषित किया जाएगा तब राष्ट्रपति उस पर अपनी स्वीकृति देने से मना नहीं कर सकते । 


संविधान में किये गए महत्वपूर्ण संविधान संशोधन -

पहला संविधान  संशोधन सन् 1951- भूमि सुधार   
इस संशोधन द्वारा संविधान मे नौवीं सूची को जोड़ा गया। 


दूसरा संविधान संशोधन सन् 1952- 1951 की जनगणना के आधार पर लोकसभा में प्रतिनिधित्व ।

सातवाँ संविधान संशोधन सन् 1956- भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन ।


नौवाँँ संविधान संशोधन सन् 1960- संविधान की प्रथम अनुसूची में परिवर्तन करके भारत और पाकिस्तान के बीच 1958 की संधि की शर्तों के अनुसार बेरूबारी, खुलना आदि क्षेत्र पाकिस्तान को दे दिए गए ।


दसवां संविधान संशोधन सन् 1961- इसके अंतर्गत भूतपूर्व पुर्तगाली अंत: क्षेत्रों दादर एवं नगर हवेली को भारत में शामिल कर उन्हें केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया ।


बारहवाँ संविधान संशोधन सन् 1962- संविधान की प्रथम अनुसूची में संशोधन कर गोवा, दमन एवं दीप को भारत में केंद्र शासित प्रदेश में शामिल कर लिया गया ।


तेरहवाँ संविधान संशोधन सन् 1962- नागालैंड के संबंध में विशेष प्रावधान अपनाकर उसे एक राज्य का दर्जा दे दिया गया ।


चौदहवाँ संविधान
 संशोधन सन् 1963- केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पुडुचेरी को भारत में शामिल किया गया ।


पंद्रहवाँ संविधान संशोधन सन् 1963- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवा मुक्ति की आयु सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी 62 वर्ष कर दी गई ।


सोहलवाँ संविधान संशोधन सन् 1963- शपथ ग्रहण के अंतर्गत ''मै भारत की स्वतंत्रता एवं अखंडता को बनाए रखूँगा" जोड़ा गया ।

सत्रहवाँ संविधान संशोधन सन् 1964 - इसके द्वारा नौवीं अनुसूची में 44 अधिनियम जोड़े गए तथा संपत्ति के अधिकार को स्पष्ट किया गया 

अट्ठारहवाँ संविधान संशोधन सन् 1966- पंजाब को भाषाई आधार पर पुनर्गठन करते हुए पंजाबी भाषा क्षेत्र को पंजाब एवं हिन्दी भाषा क्षेत्र को हरियाणा के रूप में गठित किया गया ।

पर्वतीय क्षेत्र हिमाचल प्रदेश को दे दिए गए तथा चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया ।

उन्नीसवां संविधान संशोधन सन्  1966 - इसके द्वारा निर्वाचन न्यायाधिकरणों को समाप्त करके व्यवस्था की गयी कि निर्वाचन संबंधी विवादों को सीधे उस न्यायालय में दाखिल किया जा सकता है । 

बीसवां संविधान संशोधन सन् 1966 - इसके द्वारा जिला न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा स्थानान्तरणों को वैधता प्रदान की गयी तथा अनुच्छेद 233 - क को जोड़ा गया ।

इक्कीसवां संविधान संशोधन सन् 1967- सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची के अंतर्गत पंद्रहवी भाषा के रूप में शामिल किया गया ।


बाईसवाँ संविधान संशोधन सन् 1969-
असम से अलग करके एक नया राज्य मेघालय बनाया गया ।

तेइसवां 
संविधान संशोधन सन् 1970- इसके द्वारा अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए लोकसभा तथा विधानसभाओं में आरक्षण की अवधि को और दस वर्ष तक बढ़ाया गया ।

चौबीसवाँ संविधान संशोधन सन् 1971- संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन कर सकती है ।

पञ्चीसवां संविधान संशोधन सन्1971- इसके द्वारा अनुच्छेद 31 के खण्ड ( 2 ) का संशोधन किया गया तथा अनुच्छेद 31 - ग जोड़ा गया ।

छब्बीसवां संविधान संशोधन सन् 1971- देशी राजाओं की मान्यता एवं पेंशन समाप्त ।


सत्ताईसवाँ संविधान संशोधन सन् 1971- मिजोरम एवं अरुणांचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में 
स्थापित किया गया ।

अट्ठाईसवां संविधान संशोधन सन्1972- इस संशोधन द्वारा संसद को कुछ प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारियों की सेवा शर्तों में परिवर्तन करने तथा उनकी सेवाओं को समाप्त करने का अधिकार दिया गया तथा भारतीय नागरिक सेवा के अधिकारियों के विशेषाधिकारों को समाप्त किया गया ।

उन्नतीसवां संविधान संशोधन सन् 1972- इस संविधान संशोधन द्वारा संविधान की 9 वीं अनुसूची में कुछ अधिनियमों को जोड़ा गया ।

तीसवां संविधान संशोधन सन् 1972- इस संशोधन का उद्देश्य अनुच्छेद 133 का संशोधन करके उसमें निर्धारित 20,000 रुपये की मूल्यांकन परीक्षा समाप्त करना तथा उसके स्थान पर सिविल कार्यवाही में उच्चतम न्यायालय में अपील की व्यवस्था करना है । जो केवल उच्च न्यायालय के इस प्रमाण - पत्र पर ही की जा सकेगी कि उस मामले में सामान्य महत्व की विधि का सारवान प्रश्न अंतर्ग्रस्त है और उच्च न्यायालय की राय में उस प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्णय लिये जाने की आवश्यकता है । 

इकत्तीसवाँ संविधान संशोधन सन् 1973-
लोकसभा सदस्यों की संख्या 525 से 545 कर दी गई ।

केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व 25 से घटाकर 20 कर दिया गया ।

बत्तीसवां संशोधन संविधान सन् 1974- इसके द्वारा अनुच्छेद 371 - घ तथा 371 - जोड़कर आन्ध्र प्रदेश के सम्बन्ध में विशेष प्रावधान किया गया । 

तैतीसवां संविधान संशोधन सन् 1974- इसके द्वारा संविधान के अनुच्छेद 101 तथा 191 में संशोधन करके यह व्यवस्था की गयी कि संसद या राज्य विधान मण्डलों के सदस्यों से बलपूर्वक त्यागपत्र नहीं दिलवाया जा सकता ।

चौतीसवां संविधान संशोधन सन् 1974- इसके द्वारा नवी अनुसूची में कुछ अधिनियमों को जोड़ा गया ।

पैतीसवां संविधान संशोधन सन् 1974 - इसके द्वारा सिक्किम को सह - राज्य का दर्जा प्रदान किया गया ।

छत्तीसवाँ संविधान संशोधन सन् 1975- सिक्किम को भारत का 22वा  राज्य बनाया गया ।

सैतीसवां संविधान संशोधन सन् 1975- संघ राज्य क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा तथा मन्त्रिपरिषद के गटन की व्यवस्था की गयी ।

अड़तीसवां संविधान संशोधन सन् 1975- इसके द्वारा यह व्यवस्था की गयी कि राष्ट्रपति , राज्यपालों तथा उपराज्यपालों द्वारा घोषित आपात स्थिति वाले अध्यादेशों की वैधानिकता की जांच न्यायालय नहीं कर सकते । 

उन्तालीसवां संविधान संशोधन सन् 1975 - इस संशोधन द्वारा यह व्यवस्था की गयी कि राष्ट्रपति , उपराष्ट्रपति , लोकसभाध्यक्ष तथा प्रधानमंत्री के निर्वाचन को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती । इसे 44 वें संशोधन द्वारा समाप्त कर दिया गया है । 

चालीसवां संविधान संशोधन सन् 1976- इसके द्वारा नवीं अनुसूची में कुछ अधिनियमों को जोड़ा गया है । 

इक्तालीसवां संविधान संशोधन सन् 1976- इसके द्वारा अनुच्छेद 316 ( 2 ) में संशोधन करके राज्यों के लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों तथा सदस्यों के सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष की गयी ।

बयालिसवां संविधान संशोधन सन् 1976-
 संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी धर्मनिरपेक्ष एवं एकता और अखंडता आदि शब्द जोडे गये । भाग 4 - क तथा अनुच्छेद 51 - क जोड़कर नागरिकों के 10 मूल कर्तव्यों का उल्लेख किया गया 

तैंतालीसवाँ संविधान संशोधन सन् 1977- इसके द्वारा 42 वें संवैधानिक संशोधन की कुछ धाराओं को निरस्त किया गया । 

चौवालिसवां संविधान संशोधन सन् 1978- संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों के भाग से हटा कर विधिक अधिकारों की श्रेणी में रख दिया गया ।

पैतालीसवां संविधान संशोधन सन्1980- इसके द्वारा लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के आरक्षण में दस वर्ष की वृद्धि की गयी ।

छियालीसवां संविधान संशोधन सन् 1982- इसके द्वारा कुछ वस्तुओं के सम्बन्ध में विक्रीकर की समान दरें और वसूली की एक समान व्यवस्था को अपनाया गया । 

सैंतालीसवां संविधान संशोधन सन् 1982- इसके द्वारा संविधान की नवीं अनुसूची में कुछ और अधिनियमों को जोड़ा गया ।

अड़तालीसवां संविधान संशोधन सन् 1984- इसके द्वारा संविधान के अनुच्छेद 356 ( 5 ) में परिवर्तन करके यह व्यवस्था की कि पंजाब में राष्ट्रपति शासन की अवधि को दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है । 

उनचासवां संविधान संशोधन सन् 1984- इसके द्वारा अनुच्छेद 244 तथा पांचवीं और छटीं अनुसूची में संशोधन करके त्रिपुरा में स्वायत्तशासी जिला परिषद की स्थापना का प्रावधान किया गया । 

पचासवां संविधान संशोधन सन् 1984- इसके द्वारा अनुच्छेद 33 को पुनः स्थापित करके सुरक्षा बलों के मूलाधिकारों को प्रतिबन्धित किया गया ।

इक्यावनवां संविधान संशोधन सन् 1984- इस संशोधन द्वारा मेघालय , नागालैण्ड अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की अनुसूचित जनजातियों को लोकसभा में आरक्षण प्रदान किया गया तथा नागालैण्ड और मेघालय की विधानसभाओं में जनजातियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गयी । 

बावनवाँ संविधान संशोधन सन् 1985-
  दसवीं अनुसूची दल - बदल जोड़ी गई ।


तिरपनवाँ संविधान संशोधन सन् 1986- अनुच्छेद 371 में खंड G जोड़कर मिजोरम को राज्य का दर्जा दिया गया ।

चौवनवां संविधान संशोधन सन् 1986- इसके द्वारा उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के वेतन तथा सेवा शर्तों में सुधार किया गया ।

पचपनवां संविधान संशोधन सन् 1986- अरुणांचल प्रदेश को राज्य बनाया गया ।


छप्पनवां संविधान संशोधन सन् 1987- गोवा को राज्य का दर्जा दिया गया ।

सत्तावनवां संविधान संशोधन सन् 1987- इसके द्वारा मेघालय , मिजोरम , नागालैण्ड तथा अरुणाचल प्रदेश की विधान सभाओं में जनजातियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गयी ।

अठावनवां संविधान संशोधन सन्1987- इसके द्वारा संविधान में अनुच्छेद 394 - क जोड़कर संविधान के हिन्दी में प्राधिकृत पाठ को प्रकाशित करने की व्यवस्था की गयी । 

उनसठवां संविधान संशोधन सन् 1988- इस संशोधन के द्वारा राज्यों में राष्ट्रपति शासन को 3 वर्ष तक बढ़ाने की व्यवस्था की गयी ।

साठवां संविधान संशोधन सन् 1988- इसके द्वारा अनुच्छेद 276 में संशोधन करके नगरपालिकाओं द्वारा लगाये जाने वाले बृत्तिकर की अधिकतम सीमा 250 से बढ़ाकर 2500 रु . कर दी गयी ।

इकसठवाँ संविधान संशोधन सन् 1989- मतदान के लिए आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष लाने का प्रस्ताव था ।

बासठवां संविधान संशोधन सन् 1989- इसके द्वारा लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के आरक्षण में 10 वर्ष की और वृद्धि की गयी ।

तिरसठवां संविधान संशोधन सन् 1990- इसके द्वारा संविधान के 59 वें संशोधन की व्यवस्था को समाप्त किया गया । 

चौसठवां संविधान संशोधन सन् 1990- इसके द्वारा पंजाब में राष्ट्रपति शासन में वृद्धि की गयी ।

पैंसठवां संविधान संशोधन सन् 1990- इसके द्वारा अनुच्छेद 338 में संशोधन करके अनुभूचित जाति तथा जनजाति आयोग के गठन की व्यवस्था की गयी ।

छियासठवां संविधान संशोधन सन् 1990- इसके द्वारा संविधान की नौवीं अनुसूची में कुछ और अधिनियमों को जोड़ा गया ।

सरसठवां संविधान संशोधन सन् 1990- इसके द्वारा अनुच्छेद 356 में संशोधन करके पंजाब में राष्ट्रपति शासन की अवधि 4 वर्ष तक बढ़ायी गयी ।

अरसठवां संविधान  संशोधन सन् 1991- इसके द्वारा अनुच्छेद 356 में संशोधन करके पंजाब में राष्ट्रपति शासन की अवधि 5 वर्ष तक बढ़ा दी गयी ।

उनहत्तरवां संविधान संशोधन सन् 1991- दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बनाया गया ।


सत्तरवां 
संविधान संशोधन सन् 1992- इसके द्वारा दिल्ली तथा पाण्डिचेरी । राज्य क्षेत्रों के विधानसभाओं के सदस्यों को राष्ट्रपति के निर्वाचन मण्डल में शामिल करने का प्रावधान किया गया ।

इकहत्तरवां संविधान संशोधन सन् 1992- आठवीं अनुसूची में कोकणी मणिपुरी और नेपाली भाषा को सम्मिलित किया गया ।

बहत्तरवां संविधान संशोधन सन् 1992- इसके द्वारा लोकसभा तथा राज्यसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों के सीमांकन के लिए परिसीमन आयोग के गठन की व्यवस्था की गयी 

तिहत्तरवा संविधान संशोधन सन् 1992- 93- संविधान में ग्यारहवी  अनुसूची जोड़ी गई ।

इस संशोधन के द्वारा संविधान में भाग-9 जोड़ा गया ।

चौहत्तरवा   संविधान संशोधन सन् 1993- बाहरवीं अनुसूची नगर निकाय जोड़ी गई ।


पचासीवां संविधान संशोधन सन् 2001- सरकारी सेवाओ मे अनुसूचित जाति / जनजाति के अभ्यार्थियों के लिए पदोन्नति मे आरक्षण की व्यवस्था ।


छियासीवां संविधान संशोधन सन् 2002- प्राथममिक शिक्षा को मौलिक अधिकार ।


नवासिवां संविधान संशोधन सन् 2003-
अनुसूचित जनजाति के लिये प्रथम राष्ट्रीय आयोग की स्थापना की व्यवस्था ।


इक्यानवेवां संविधान संशोधन सन् 2003-
मंत्रियों की संख्या 15% सीमित की गयी (छोटे राज्यों मे 12%)


बानवेवां संविधान संशोधन सन् 2003- संविधान की 8वीं अनुसूची मे बोडो, डोगरी, मैथिली, और मंथाली 
भाषाओं का समावेश ।

छानवेवां संविधान संशोधन सन् 2011-
संविधान की 8वी अनुसूची मे उड़ीया के स्थान पर ओडिया लिखा गया ।


निन्नानवेवां संविधान संशोधन सन् 2014-
राष्ट्रीय न्यायायिक नियुक्ति आयोग की स्थापना ।


100वाँ संविधान संशोधन सन् 2015-
भारत - बांग्लादेश भूमि हस्तांतरण।


101
वाँ संविधान संशोधन 2016-17 - GST


⧭आशा करते है कि दी गयी जानकारी आपको समझ आई होगी । पोस्ट के बारे आपकी क्या प्रतिक्रिया हैं इसके इसके लिए कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं 

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