यूरोप मे राष्ट्रवाद का उदय(The Rise of Nationalism in Europe)

NCERT Notes for CBSE/UP Class-10 Social Science, (History/इतिहास) (Bhart aur samkalin visv/भारत और समकालीन विश्व -2) Chapter-1 यूरोप मे राष्ट्रवाद का उदय(The Rise of Nationalism in Europe) Notes in hindi.

📚Chapter-1📚

🌤यूरोप मे राष्ट्रवाद का उदय🌤

✳️राष्ट्रवाद:- अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना को राष्ट्रवाद कहते हैं।

✳️राष्ट्र:- अरनेस्ट रेनर के अनुसार समान भाषा नस्ल धर्म से बने क्षेत्र को राष्ट्र कहते हैं। एक राष्ट्र लंबे प्रयासों त्यागो और निष्ठा का चरम बिंदु होता है ।

✳️1789 की फ्रांसीसी क्रांति :- 1789 की फ्रांसीसी क्रांति राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति थी। इस क्रांति से पहले फ्रांस एक ऐसा राज्य था जिसके संपूर्ण भू-भाग पर एक निरंकुश राजा का शासन था।फ्रांसीसी क्रांति के आरंभ से ही फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने ऐसे अनेक कदम उठाए जिनसे फ्रांसीसी लोगों में एक सामूहिक पहचान ( राष्ट्रवाद) की भावना पैदा हो सके। यूरोप में उन्नीसवीं सदी के शुरूआती दशकों में राष्ट्रीय एकता से संबंधित विचार उदारवाद से करीब से जुड़े थे।

✳️राष्ट्र की भावना की रचना/राष्ट्र की रचना:- राजसी प्रतीक को हटाकर एक नए फ्रांसीसी झंडे का इस्तेमाल किया गया जो कि तिरंगा था। राष्ट्र के नाम पर नए स्तुति गीत बनाए गए और शपथ लिए गए। एक पितृभूमि और उसके नागरिकों की भावना का प्रचार। इस्टेट जेनरल को सक्रिय नागरिकों द्वारा चुना गया और उसका नाम बदलकर नेशनल एसेंबली कर दिया गया। भार और मापन की एक मानक पद्धति अपनाई गई।

✳️नेपोलियन का शासन काल:- नेपोलियन 1804 से 1815 के बीच फ्रांस का बादशाह था। नेपोलियन ने फ्रांस में प्रजातंत्र को तहस नहस कर दिया और वहाँ फिर से राजतंत्र की स्थापना कर दी। उसने व्यवस्था को बेहतर और कुशल बनाने की कोशिश की। 1804 का सिविल कोड लागू किया, जिसे नेपोलियन कोड भी कहा जाता है। राष्ट्रीयवादी विचार को बांटने के लिए उन्होंने कुछ क्षेत्रों में कब्जा कर लिया और कर को बढ़ाना और जबरन सेना मे भर्ती जैसे अनेक कानून व्यवस्था स्थापित कर दिया।

✳️1804 की नेपोलियन संहिता (नागरिक संहिता ) :-इसे 1804 में लागू किया गया। इसने जन्म पर आधारित विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया। इसने न केवल न्याय के समक्ष समानता स्थापित की बल्कि सम्पत्ति के अधिकार को भी सुरक्षित किया। सामंती व्यवस्था को खत्म कर किसानों को भू दासत्व और जगीरदारी शुल्क से मुक्ति दिलवायी। प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया।

✳️यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण :- उन्नीसवीं सदी के मध्य के पहले यूरोपीय देश उस रूप में नहीं थे जिस रूप में उन्हें हम आज जानते हैं।सन 1789 में शुरु होने वाली फ्रांस की क्रांति के साथ ही नए राष्ट्रों के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरु हो गई थी और फ्रांस का एक प्रजातांत्रिक देश के रुप में गठन हुआ। यही सिलसिला यूरोप के अन्य भागों में भी चलने लगा और बीसवीं सदी के शुरुआत आते आते विश्व के कई भागों में आधुनिक प्रजातांत्रिक व्यवस्था की स्थापना हुई। 

✳️कुलीन वर्ग :- ये जमीन के मालिक थे। यह यूरोपीय महाद्वीप का सबसे शक्तिशाली वर्ग था। शक्तिशाली कुलीन वर्ग संख्या के लिहाज से एक छोटा सा समूह था जनसंख्या के अधिकांश लोग कृषक थे । 

✳️मध्यम वर्ग का उदय:- पश्चिमी यूरोप और केंद्रीय यूरोप के कुछ भागों में उद्योग धंधे बढ़ने लगे थे। जहाँ एक नए व्यावसायिक वर्ग का उदय हुआ। इससे समाज में नए समूहों और वर्गों का जन्म होने लगा। एक वर्ग कामगारों का और दूसरा मध्यम वर्ग का। उद्योगपति, वयवसायी और व्यापारी मध्यम वर्ग का मुख्य हिस्सा थे। 

✳️उदारवादी राष्ट्रवाद की भावना:- उदारवाद यानि Liberalism शब्द लातिनी भाषा के मूल शब्द liber पर आधारित है। जिसका अर्थ है स्वतंत्रता। नए मध्यम वर्ग के लिए उदारवाद का अभिप्राय था व्यक्ति के लिए आज़ादी व कानून के समक्ष समानता ।
उदारवादी राष्ट्रवाद के चलते राष्ट्रवाद का विचार सब जगह फैलने लगा। इसी वजह से 1789 में फ्रांस की क्रांति हुई। इससे एक राज्य के अंदर जो भी नियंत्रण था उसे खत्म कर दिया गया लेकिन अलग अलग राज्यों के बीच के सीमा शुल्क को खत्म नहीं कर पाया। इसके लिए एक संगठन बनाया गया जिसका नाम था "जॉलबेराइन (zollvercin ) जितने भी शुल्क अवरोध थे उसे समाप्त कर दिया और मुद्राओं की संख्या दो कर दी। 

✳️1815 के बाद एक नए रुढ़िवाद का जन्म:- ऐसा राजनीतिक दर्शन जो परंपरा, स्थापित संस्थानों और रिवाजों पर जोर देता है और तेज बदलावों की बजाए क्रमिक और धीरे धीरे विकास को प्राथमिकता देता है।
सन 1815 में नेपोलियन की पराजय के बाद, यूरोप की सरकारें रुढ़िवाद को अपनाना चाहती थीं। यूरोपीय सरकार पारंपरिक संस्थाएं को बनाए रखना चाहते थे।इसके लिए उन्होंने नेपोलियन के समय जितने भी बदलाव हुए थे उन सब को खत्म कर दिया गया, जिसके लिए एक समझौता किया गया, जिसका नाम था वियना समझौता या वियना संधि। 

✳️वियना कांग्रेस/वियना संधि:- 1815 में ब्रिटेन, प्रशा, रूस और ऑस्ट्रिया जैसी यूरोपीय शक्तियां एक समझौता तैयार करने के लिए वियना में इकट्ठा हुए जिसकी अध्यक्षता आस्ट्रियन के चांसलर ड्यूक मैटरनिख ने की ।
🔸वियना संधि के तहत मुख्य  निर्णय :-
1. पहला फ्रांस की सीमाओं पर कई राज्य कायम कर दिया गया ताकि भविष्य में फ्रांस अपना विस्तार ना कर सके।
2. फ्रांसीसी क्रांति के दौरान हटाए गए बूर्वो वंश को सत्ता में बहाल किया गया।
3. राजतंत्र को जारी रखा गया ।

✳️क्रांतियों का युग (1830-1848) :- यूरोप के अनेक क्षेत्रों में उदारवाद और राष्ट्रवाद को क्रांति से जोड़कर देखा जाने लगा। प्रथम विद्रोह फ्रांस में जुलाई 1830 में हुआ। बुर्बो राजा, जिन्हें 1815 के बाद हुई रूढ़िवाद प्रतिक्रिया के दौरान सत्ता में बहाल किया था उन्हें उदारवादी क्रांतियों ने उखाड़ फेंका उनकी जगह एक संवैधानिक राजतंत्र स्थापित किया गया जिसका अध्यक्ष लुई फिलिप था। 

✳️रूमानीवाद :- एक ऐसा सांस्कृतिक आंदोलन जो एक खास तरह की राष्ट्रीय भावना का विकास करना चाहता था । 

✳️भूख कठिनाई और जन विद्रोह:- 1830 का दशक यूरोप के लिए आर्थिक तंगी का दशक था। उन्नीसवीं सदी के शुरु के आधे वर्षों में जनसंख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई थी। बेरोजगारों की संख्या में कई गुणा इजाफा हुआ था और फसल के नुकसान और खाद्यान्नों की बढ़्ती हुई कीमतों के कारण कई गाँवों और शहरों में भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।भोजन की कमी और बढ़ती बेरोजगारी के कारण पेरिस के लोग सड़कों पर उतर आए थे। विद्रोह इतना जबरदस्त था कि लुई फिलिप को वहाँ से पलायन करना पड़ा। और नेशनल एसेंबली ने प्रजातंत्र की घोषणा कर दी।

✳️उदारवादियों की क्रांति:- जब गरीबों का विद्रोह 1848 में हो रहा था, तभी एक अन्य क्रांति भी शुरु हो चुकी थी जिसका नेतृत्व पढ़ा लिखा मध्यम वर्ग कर रहा था। मध्यम वर्ग के स्त्री और पुरुषों ने राष्ट्रीय एकीकरण और संविधान की मांग शुरु कर दी। उनकी मांग थी कि संसदीय प्रणाली पर आधारित राष्ट्र का निर्माण हो। वे एक संविधान, प्रेस की आजादी चाहते थे।

✳️जर्मनी का एकीकरण :- 1848 में यूरोपियन सरकार ने बहुत कोशिश की कि वे जर्मनी का एकीकरण कर दे परंतु वह ऐसा नहीं कर पाए। क्योंकि राष्ट्र निर्माण की यह उदारवादी पहल राजशाही और फौज की ताकत ने मिलकर दबा दी उसके बाद प्रशा ने यह भार अपने ऊपर लेते हुए कहा कि वे जर्मनी का एकीकरण करके ही रहेंगे उस समय प्रशा का मुख्यमंत्री ऑटोमन बिस्मार्क था। प्रशा ने एक राष्ट्रीय एकीकरण के आंदोलन का नेतृत्व किया। 7 वर्ष के दौरान ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ्रांस से तीन युद्ध में प्रशा की जीत हुई और एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हुई। 1871 में प्रशा के राजा विलियम प्रथम को जर्मनी का राजा घोषित किया गया।

✳️इटली का एकीकरण :- 19वीं सदी मे इटली सात राज्यों में बँटा हुआ था। 1830 के दशक में ज्यूसेपे मेत्सिनी ने इटली के एकीकरण के लिए कार्यक्रम प्रस्तुत किया। और यंग इटली नामक एक गुप्त संगठन भी बनाया था। 1831 एवं 1848 के क्रांतिकारी विद्रोह असफल हुए। 1859 में फ्रांस से सार्डिनिया पीडमॉण्ट ने एक चतुर कूटनीतिक संधि की जिसके माध्यम से उसने आस्ट्रियाई बलों को हरा दिया। 1861 में इमेनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया।

✳️ब्रिटेन का एकीकरण/राष्ट्रवाद :- 18 वीं सदी के पहले ब्रितानी राष्ट्र था ही नहीं। ब्रितानी द्वीप समूह में रहने वाले लोगों- अंग्रेज, वेल्श, स्काट आयरिश की मुख्य पहचान नृजातीय थी। आंग्ल राष्ट्र धीरे-धीरे धन, संपदा, महत्व और ताकत में बढ़ रहा था।लंबे झगड़े के बाद आंग्ल संसद ने 1688 में राजतंत्र से ताकत छीन ली थी। 1707 में इंगलैंड और स्कॉटलैंड के बीच यूनियन ऐक्ट बना जिससे “यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन” की स्थापना हुई। उसके बाद 1801 में आयरलैंड को जबरदस्ती यूनाइटेड किंगडम में शामिल कर लिया गया। एक नए ब्रितानी राष्ट्र का निर्माण किया गया। 

✳️ज्यूसेपे मेत्सिनी :- इनका जन्म 1807 में जेनोआ में हुआ था और कुछ समय पश्चात् वह कार्बोनारी में गुप्त संगठन के सदस्य बन गए। चौबीस साल की युवावस्था में लिगुरिया में क्रांति करने के लिए उन्हें 1831 में देश निकाला दे दिया गया। तत्पश्चात् उन्होनें दो और भूमिगत संगठनों की स्थापना की। पहला था मार्सेई में यंग इटली और दूसरा बर्न में यंग यूरोप मेत्सिनी द्वारा राजतंत्र का जोरदार विरोध एवं उसके प्रजातांत्रिक सपनों ने रूढ़िवादियों के मन में भय भर दिया। “ मैटरनिख ने उसे हमारी सामाजिक व्यवस्थाओं का सबसे खतरनाक दुश्मन बताया।

✳️ज्यूसेपे गैरीबॉल्डी :- वह नियमित सेना का हिस्सा नहीं था। उसने इटली के एकीकरण के लिए सशस्त्र स्वयंसेवकों का नेतृत्व किया । 1860 में वे दक्षिण इटली और दो सिसिलियों के राज्य में प्रवेश कर गए और स्पेनी शासकों को हटाने के लिए स्थानीय किसानों का समर्थन पाने में सफल रहे । उसने दक्षिणी इटली एवं सिसली को राजा इमैनुएल द्वितीय को सौंप दी और इस प्रकार इटली का एकीकरण संभव हो सका।

✳️राष्ट्र की दृश्य कल्पना:- कलाकारों ने एक राष्ट्र को दर्शाने के लिए महिला की तस्वीर का इस्तेमाल किया। फ्रांसीसी क्रांति के दौरान कलाकारों ने उदारवाद, न्याय और प्रजातंत्र जैसी अमूर्त भावनाओं को दर्शाने के लिए औरत को एक रूपक के तौर पर इस्तेमाल किया। फ्रांस में राष्ट्र को मारीयान का नाम दिया गया।जर्मन राष्ट्र का प्रतीक जर्मेनिया को बनाया गया। 

✳️राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद :- 19वीं सदी तक जो राष्ट्रवाद की भावना थी अब वह साम्राज्यवाद में बदलने लगा। 
साम्राज्यवाद - जब कोई देश अपने देश की शक्ति को बढ़ाता है, आर्मी और अन्य साधन का प्रयोग करके उसे साम्राज्यवाद कहते हैं ।1871 के बाद यूरोप में गंभीर राष्ट्रवादी तनाव का स्रोत बाल्कन क्षेत्र था। बाल्कन क्षेत्र में रोमानी राष्ट्रवाद के विचार फैलने और ऑटोमन साम्राज्य के विघटन से स्थिति काफी विस्फोटक हो गई। उस समय जितने भी बड़ी शक्तियां थी बाल्कन क्षेत्र को अपने-अपने में शामिल करना चाहते थे। इसके लिए अनेक युद्ध हुए जिनके नतीजे कुछ भी नहीं निकला और प्रथम विश्व युद्ध हुआ जिससे राष्ट्रवाद की भावना पूरे विश्व में फैल गई।

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