लॉर्ड कार्नवालिस 1786 - 1793 तथा (1805)

लॉर्ड कार्नवालिस - 1786 - 1793 तथा (1805) 


लॉर्ड कार्नवालिस ने सन् 1781 में अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश सेना का प्रतिनिधित्व किया था । 
⤷इसमें यार्क टाऊन का युद्ध (1781) हुआ था ।
⤷इसने जार्ज वाशिंगटन के आगे इथियार दिये थे ।

लॉर्ड कार्नवालिस 1786 में बंगाल का गवर्नर जनरल इस शर्त पर बनकर आया कि इसे भारत का प्रधान सेनापति बनाया जाए । 

➤1786 जिले में मजिस्ट्रेट कार्य , राजस्व एकत्र का कार्य व न्यायिक कार्य एक ही आदमी को सोंपा गया । 

➤इसने जिला फौजदारी न्यायालय समाप्त कर चार जगहों पर ( कलकत्ता , पटना , डक्का (ढाका) , मुर्शिदाबाद में )  भ्रमणकारी न्यायालय स्थापित किये । 

इसने न्यायिक संगठन स्थापित किया । 

1789 कार्नवालिस ने दास प्रथा पर रोक लगाई ।

तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध (1790-92 कार्नवालिस के समय ही हुआ ।
⤷इसमें टीपू सुल्तान को पराजित हुआ , इस युद्ध में श्रीरंगपट्टनम की संधि हुई ।


कार्नवालिस संहिता -1793

⧪कॉर्नवालिस ने 1793 ई . में प्रसिद्ध कॉर्नवालिस कोड का निर्माण करवाया , जो शक्तियों के पृथक्कीकरण सिद्धान्त पर आधारित था ।
⤷इसके तहत बंगाल में स्थायी बन्दोबस्त लागू हुआ -22 मार्च 1793 
⤷इसके तहत ही कलेक्टर को राजस्व वसूली का अधिकार दिया गया । 
⤷इसके द्वारा न्यायिक अधिकार को अलग कर दिया गया । 
⤷भारत में शक्ति के प्रथक्करण का सिद्धांत दिया गया । 
⧪कार्नवालिस ने प्रसंविद्धाबंद नागरिक सेवा की शुरुआत की । 
⤷इसलिए कार्नवालिस को भारतीय सिविल सेना का जनक कहा जाता है 

⧪कार्नवालिस ने नये पुसिल थानो की स्थापना की व पुलिस विभाग का गठन किया ।   
⤷इसी कारण इसे भारतीय पुलिस सेवा का जनक कहा जाता है ।

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