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बौद्ध धर्म | गौतम बुद्ध | बौद्ध धर्म से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

बौद्ध धर्म - गौतम बुद्ध


इस पोस्ट में बौद्ध धर्म के बारे में जानेंगे बौद्ध धर्म से संबधित जो भी महत्वपूर्ण बातें(तथ्य) हैं उनके बारे में इस पोस्ट में बताया गया हैं बौद्ध धर्म से संबधित जो भी प्रश्न बनते हैं अर्थात परीक्षा में पूछे जाते हैं या पूछे जा सकते हैं उनके बारे में बहुत ही आसान तरीके से जानने की कोशिश करेंगे पोस्ट को पूरा पढ़े हम आशा करते हैं की दी गयी जानकारी आपको जरूर समझ आएगी और बौद्ध धर्म से जुड़े जो तथ्य हैं उनके बारें आप अच्छे से समझ पायेंगे ।

बौद्ध धर्म बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे ।
गौतम बुद्ध को एशिया का ज्योति पुज्ज ( Light of Asia ) कहा जाता है ।

गौतम बुद्ध का जन्म हुआ- 563 ई. पू. में कपिलवस्तु के लुम्बिनी नामक स्थान पर 

गौतम बुद्ध की मृत्यु हुई- 483 ई. पू. में कुशीनारा,  देवरिया , उत्तर प्रदेश  में ( 80 वर्ष की अवस्था में )
गौतम बुद्ध की मृत्यु चुन्द द्वारा अर्पित भोजन करने के बाद हो गयी ।
गौतम बुद्ध की मृत्यु को  बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहा गया है ।

बुद्ध के जीवन से संबंधित बौद्ध धर्म के प्रतीक कुछ प्रतीक हैं जो इस प्रकार हैं -
गौतम बुद्ध के जन्म का प्रतीक ➣कमल एवं सांड 
गृहत्याग का प्रतीक ➣घोड़ा
ज्ञान का प्रतीक ➣पीपल ( बोधि वृक्ष ) 
निर्वाण का प्रतीक ➣पद चिह्न
मृत्यु का प्रतीक ➣स्तूप

गौतम बुद्ध के बचपन का नाम था ➣सिद्धार्थ  
गौतम बुद्ध  पिता नाम था ➣शुद्धोधन ( शाक्य गण के मुखिया थे )
गौतम बुद्ध की माता का नाम था ➣मायादेवी
➤मायादेवी की मृत्यु गौतम बुद्ध के जन्म के सातवें दिन ही हो गई थी ।
➤गौतम बुद्ध का लालन पालन गौतम बुद्ध की सौतेली माँ प्रजापति गौतमी ने किया था ।

गौतम बुद्ध की पत्नी का नाम था ➣यशोधरा ( इनका विवाह 16 वर्ष की अवस्था  हो गया था )
गौतम बुद्ध के पुत्र का नाम था ➣राहुल

सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) जब कपिलवस्तु की सैर पर निकले तो उन्होंने चार दृश्यों को क्रमशः देखा ➣ 1. बूढा व्यक्ति , 2. एक बीमार व्यक्ति , 3 शव एवं 4. एक सन्यासी ।
सांसारिक समस्याओं से व्यथित होकर सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की अवस्था में गृह त्याग किया ।
गृह त्याग को बौद्धधर्म में महाभिनिष्कमण कहा गया है ।
➤गृह त्याग करने के बाद सिद्धार्थ ( बुद्ध ) ने वैशाली के आलारकलाम से सांख्य दर्शन की शिक्षा ग्रहण की । 
➤आलारकलाम सिद्धार्थ के प्रथम गुरु हुए ।
➤आलारकलाम के बाद सिद्धार्थ ने राजगीर के रुद्रकरामपुत्त से शिक्षा ग्रहण की ।
➤उरुवेला में सिद्धार्थ को कौण्डिन्य , वप्पा , भादिया , महानामा एवं अस्सागी नामक पाँच साधक मिले ।
➤बिना अन्न - जल ग्रहण किए 6 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख की पूर्णिमा की रात निरंजना ( फल्गु ) नदी के किनारे , पीपल वृक्ष के नीचे , सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ ।

जब सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्ति प्राप्ति हुई उसके बाद सिद्धार्थ गौतम बुद्ध के नाम से जाने गए । 
जिस स्थान पर गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई वह स्थान बौद्धगया  कहलाया । 

➤बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश  दिया था - सारनाथ ( ऋषिपतनम ) में 
➤बुद्ध के प्रथम उपदेश को  बौद्ध ग्रंथों में धर्मचक्रप्रवर्तन कहा गया है । 
➤बुद्ध ने अपने उपदेश जनसाधारण की भाषा पालि में दिए ।
➤बुद्ध ने अपने उपदेश कोशल , वैशाली , कौशाम्बी एवं अन्य राज्यों में दिए ।
➤बुद्ध ने अपने सर्वाधिक उपदेश कोशल देश की राजधानी श्रावस्ती में दिए ।
➤गौतम बुद्ध के प्रमुख अनुयायी शासक थे - बिम्बिसार , प्रसेनजित तथा उदयिन ।

➤बुद्ध की मृत्यु 80 वर्ष की अवस्था में 483 ई. पू. में कुशीनारा, ( देवरिया , उत्तर प्रदेश ) में हुई ।
➤गौतम बुद्ध की मृत्यु चुन्द द्वारा अर्पित भोजन करने के बाद हो गयी ।
➤गौतम बुद्ध की मृत्यु को  बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहा गया है ।
➤मुल्लों ने अत्यन्त सम्मानपूर्वक बुद्ध का अन्त्येष्टि संस्कार किया ।

➤एक अनुश्रुति के अनुसार मृत्यु के बाद बुद्ध के शरीर के अवशेषों को आठ भागों में बाँटकर उन पर आठ स्तूपों का निर्माण कराया गया ।
➤बुद्ध के जन्म एवं मृत्यु की तिथि को चीनी परम्परा के कैन्टोन अभिलेख के आधार पर निश्चित किया गया है ।

बौद्धधर्म के बारे में विशद ज्ञान  त्रिपिटक से प्राप्त होता है-
1. विनयपिटक 2. सूत्रपिटक 3. अभिदम्भपिटक 
तीनों पिटको की भाषा पाली हैं ।

बौद्धधर्म मूलत: अनीश्वरवादी है । इसमें मात्मा की परिकल्पना भी नही है ।
बौद्धधर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है । 
तृष्णा को शीण हो जाने की अवस्था को ही बुद्ध ने निर्माण कहा है ।
विश्व दुखों से भरा है ' का सिद्धान्त बुद्ध ने उपनिषद से लिया ।

बुद्ध के अनुयायी दो भागों में विभाजित थे -
1. भिक्षुक 
2. उपासक 
भिक्षुक ➣बौद्धधर्म के प्रचार के लिए जिन्होंने संन्यास ग्रहण किया , उन्हें ' भिक्षुक कहा गया ।
उपासक ➣गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हुए बौद्ध धर्म अपनाने वालों को ' उपासक कहा गया ।

बौद्धसंघ में सम्मिलित होने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष थी ।
बौद्धसंघ में प्रविष्टि होने को उपसम्पदा कहा जाता था ।
बौद्धधर्म के त्रिरत्न हैं - बुद्ध , धम्म , संघ ।

बौद्ध सभाएँ -
प्रथम बौद्ध संगीति हुई ➣483 ई. पू. , में  राजगृह  में 
अध्यक्ष ➣महाकश्यप  
शासनकाल ➣अजातशत्रु 

द्वितीय बौद्ध संगीति हुई ➣383 ई. पू. , वैशाली में  
अध्यक्ष ➣सबाकामी 
शासनकाल ➣कालाशोक 

तृतीय बौद्ध संगीति हुई ➣255 ई. पू. , पाटलिपुत्र में 
अध्यक्ष ➣मोग्लिपुत्त तिस्स 
शासनकाल ➣अशोक 

चतुर्थ बौद्ध संगीति हुई ➣ई. की प्रथम शताब्दी में , कुण्डलवन में 
अध्यक्ष ➣वसुमित्र/अश्वघोष 
शासनकाल ➣कनिष्क
चतुर्थ बौद्ध संगीति के बाद बौद्धधर्म दो भागों विभाजित हो गया ➣हीनयान एवं महायान में
 
धार्मिक जुलूस का प्रारंभ सबसे पहले बौद्धधर्म के द्वारा प्रारंभ किया गया ।
बौद्धों का सबसे पवित्र त्योहार वैशाख पूर्णिमा है , जिसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है । 
बुद्ध पूर्णिमा के ही दिन बुद्ध का जन्म , ज्ञान की प्राप्ति एवं महापरिनिर्वाण की प्राप्ति हुई ।

बुद्ध ने सांसारिक दुखों के सम्बन्ध में चार आर्य सत्यों का उपदेश दिया ➣ 1. दुःख 2. दुःख समुदाय 3. दुःख निरोध 4. दुःख निरोधगामिनी प्रतिपदा 

इन संसारिक दुःखों से मुक्ति हेतु , बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग की बात कही । ये साधन है - 1. सम्यक् दृष्टि 2. सम्यक् संकल्प  3. सम्यक वाणी 4. सम्यक कर्मान्त 5 सम्यक् आजीव 6. सम्यक् व्यायाम 7. सम्यक् स्मृति 8. सम्यक् समाधि

बुद्ध धर्म से जुड़े मुख्य तथ्य-
बुद्ध ने मध्यम मार्ग ( मध्यमा प्रतिपद ) का उपदेश दिया ।
अनीश्वरवाद के संबंध में बौद्धधर्म एवं जैनधर्म में समानता है ।
जातक कथाएँ प्रदर्शित करती हैं कि बोधिसत्व का अवतार मनुष्य रूप में भी हो सकता है तथा पशुओं के रूप में भी ।
सर्वाधिक बुद्ध मूर्तियों का निर्माण गन्धार शैली के अन्तर्गत किया गया
बुद्ध की प्रथम मूर्ति संभवतः मथुरा कला के अन्तर्गत बनी थी । 
तिब्बत , भूटान एवं पड़ोसी देशों में बौद्ध धर्म का प्रचार पद्संभव ( गुरु रिनपाँच ) ने किया । 
पद्संभव का संबंध बौद्ध धर्म के बज्रयान शाखा से था ।
पद्संभव की 123 फीट ऊँची मूर्ति हिमाचल प्रदेश के रेवाल सर झील में है ।
भारत में उपासना की जाने वाली प्रथम मूर्ति संभवतः बुद्ध की थी ।


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